Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga

Sarva Karya Siddhi Saundarya Lahri Mantra Prayoga समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु सौन्दर्यलहरी के कुछ विशिष्ट प्रयोग

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आदिगुरू भगवत्पाद शंकराचार्य ने सौन्दर्य लहरी नामक ग्रन्थ में मां त्रिपुरसुन्दरी के स्वरूप का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है। उनके अनिवर्चनीय स्वरूप का वर्णन करने के लिए ही उन्होंने सौन्दर्य लहरी ग्रन्थ की रचना की जिसमें उन्होंने बहुत ही सुन्दर ढंग से मां की स्तुति की है। वास्तव में इसके दो खण्ड हैं…..आनन्द लहरी और सौन्दर्य लहरी। इन दोनों को एकत्र करके ही सौन्दर्य लहरी का नाम दिया गया है। इसमें प्रस्तुत स्तुति बहुत ही प्रभावी और रहस्यों से परिपूर्ण है। इससे कई साधनांए एवं ऐसे प्रयोग सिद्ध होते हैं, जो मानव जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्वपूर्ण हैं।

भगवती त्रिपुर सुन्दरी की इस स्तुति से साधकों को अत्यन्त ही सुख, शांति एवं परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। उस परम शक्ति के प्रकाश से सम्पूर्ण जगत प्रकाशमान है। यन्त्र, मन्त्र एवं तन्त्र के माध्यम से हम उनकी उपासना बाह्य रूप में करते हैं।

यंहा भी मैं कुछ ऐसे प्रयोग दे रहा हूँ जिनमें मन्त्र एवं यन्त्र का प्रयोग किया गया है। इन दोनों के माध्यम से हम अपने जीवन की बहुत सी समस्याओं का समाधान भगवती की कृपा से कर सकते हैं। यन्त्रों की उत्पत्ति भगवान शिव के ताण्डव नृत्य से मानी जाती है। मन्त्रों के साथ यन्त्रों का प्रयोग आदि काल से होता रहा है। अतः साधक दोनों का प्रयोग करें।

नोट – केवल श्री विद्या में दीक्षित साधक ही यह प्रयोग करें अथवा सर्वप्रथम श्री विद्या की दीक्षा प्राप्त करें।

Aghorastra Mantra Sadhna Vidhi in Hindi & Sanskrit Pdf अघोरास्त्र साधना विधि एवं नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र

घोरास्त्र मंत्र के स्मरण मात्र से मनुष्यों के सारे उपद्रव नष्ट हो जाते हैं। भगवन शिव का यह मंत्र बहुत ही शक्तिशाली है।

जहाँ असमय में गर्भपात हो या जहाँ बालक जन्म लेते ही मर जाता हो तथा जिस घर में विकृत अंग वाले शिशु उत्पन्न होते हों तथा जहाँ समय पूर्ण हाने से पूर्व ही बालक का जन्म होता हो, वहाँ इन सब दोषों के शमन के लिए दस हजार आहुतियां देनी चाहिये। सिद्धि साधन में तिल मिश्रित घी से एक लाख हवन किया जाय तो वह उत्तम है, मध्यम सिद्धि के साधन में अर्धलक्ष और अधम सिद्धि के लिए पचीस हजार आहुति देनी चाहिये। जैसा जप हो , उसके अनुसार ही होम होना चाहिये। इससे संग्राम में विजय प्राप्त होती हैा न्यासपूर्वक तेजस्वी पंचमुख का ध्यान करके ‘अघोरास्त्र’ का जप करना चाहिये।

Shiva Shadakshari Mantra Sadhna Evam Upasana Vidhi शिव षडाक्षरी मंत्र साधना एवं सिद्धि

lord-shiva
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सम्पुर्ण जगत में भगवान शिव के समान कोई नही हैा उनकी उपासना से बढ़कर कोई उपसाना नही है एवं उनके मंत्रो से बढ़कर कोई मंत्र नही हैा
मनुष्य योनि प्राप्त करना तभी सफल है जब यह भगवान शिव की सेवा एवं भक्ति में समर्पित हो जाये । भगवान शिव को प्रसन्न करना ही मनुष्य का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए । जिस व्यक्ति ने इस जन्म में भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया, उसके लिए करने को कुछ शेष नही रह जाता ।
वैसे तो भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोई विधि नही है क्योंकि वो अपने भक्तों पर कब और कैसे प्रसन्न हो जायें ये कोई नही जानता फिर भी गुरूओं के मुख से जो कुछ भी प्राप्त हुआ उसके अनुसार व्यक्ति को साधना करनी चाहिए ।
भगवान शिव का षडाक्षरी मंत्र सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वशक्तिशाली मंत्र हैा इस मंत्र के जप से आध्यात्मिक विकास होता है एवं अन्त में मोक्ष प्राप्ति होती हैा इस संसार के सभी ऐश्वर्य एवं भोग शिव साधक के आगे नतमस्तक रहते हैा कोई दुख अथवा कष्ट भगवान शिव के साधक को नही छू सकता । शिव योगी सदैव निरोगी रहता है एवं 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर मोक्ष प्राप्त करता हैा

 

Vashikaran

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